स्वयंसेवा वह 'सॉफ्टवेयर' जो दुनिया को क्रैश होने से बचाता है

स्वयंसेवा वह 'सॉफ्टवेयर' जो दुनिया को क्रैश होने से बचाता है

(05 दिसम्बर अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस) 

 संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा हर साल 5 दिसंबर को स्थापित अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस स्वयंसेवकों के महत्वपूर्ण, निस्वार्थ योगदान को स्वीकार करने और उसे बढ़ावा देने का एक वैश्विक अवसर है।


समाज में स्वयंसेवा की आवश्यकता और महत्व से हम सभी भली-भांति परिचित हैं। जब कोरोना महामारी, विनाशकारी बाढ़, भूकंप जैसी भीषण आपदाएं आती हैं, तब सरकारी तंत्र के साथ-साथ स्वयंसेवक ही तत्काल राहत की बागडोर संभालते हैं। वे अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर समाज की सामूहिक ज़िम्मेदारी का निर्वहन करते हैं, क्योंकि कोई भी सरकार अकेले हर चुनौती का सामना प्रभावी ढंग से नहीं कर सकती।
स्वयंसेवा केवल संकटकालीन प्रतिक्रिया तक ही सीमित नहीं है; यह सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करती है, हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाती है और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह नागरिकों में ज़िम्मेदारी की भावना जागृत करती है और मानवीय एकजुटता का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है।

यह पहल स्वयंसेवा के माध्यम से समग्र मानवता की बेहतरी के लिए बदलाव लाने की सामूहिक क्षमता की एक याद दिलाती है। यह विशेष दिन उन अनगिनत व्यक्तियों को सम्मानित करता है जो निस्वार्थ सेवा के लिए अपना बहुमूल्य समय समाज एवं मानवता के लिए समर्पित करते हैं। कई चुनौतियों और बाधाओं के बावजूद, वे अक्सर बिना किसी प्रचार या पहचान के अपना महत्वपूर्ण कार्य जारी रखते हैं। ये सभी स्वयंसेवक समाज के उत्थान के लिए अथक प्रयास करते हैं, और यह उल्लेखनीय है कि अधिकांश स्वयंसेवक अवैतनिक  होते हैं, मतलब उन्हें इसके लिए कोई वेतन नहीं मिलता, बस समाज प्रेम का एक ज़ज्बा होता है l


उनके कार्यों में विविधता शामिल है, जैसे जानवरों को बचाना, बुजुर्गों की सहायता करना, गरीबों की मदद करना और वंचितों को शिक्षित करना। विश्व स्तर पर, एक अरब से भी अधिक लोग अपने समुदायों को बेहतर बनाने के लिए अपना समय, प्रतिभा और ज्ञान का योगदान देते हैं।

 स्वयंसेवक समाज के हर स्तर और क्षेत्र में मौजूद हैं — वे वंचित बच्चों और वयस्कों को व्यावहारिक देखभाल प्रदान करने से लेकर जटिल तकनीकी और कानूनी मुद्दों पर विशेषज्ञ सलाह देने तक, हर तरह से मदद करते हैं। हर व्यक्ति अपने साथ कुछ अनूठा कौशल और अनुभव लेकर आता है, जिससे सामूहिक प्रयास और मजबूत होते हैं। संयुक्त राष्ट्र की उप महासचिव ने इस विशेष दिन पर स्वयंसेवकों के अमूल्य योगदान के लिए उनका धन्यवाद किया और कहा कि वे "विकास चुनौतियों और आम भलाई के लिए ठोस और व्यावहारिक समाधान लेकर आते हैं।"



संयुक्त राष्ट्र महासभा वैश्विक स्तर पर स्वयंसेवकों द्वारा किए गए महत्वपूर्ण योगदानों को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाली पहली संस्था थी। मानवीय प्रयासों और सतत आर्थिक व सामाजिक विकास में स्वयंसेवा की शक्ति को स्वीकार करते हुए, महासभा ने 17 दिसंबर 1985 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव 40/212 अपनाया। इस प्रस्ताव के परिणामस्वरूप, हर साल 5 दिसंबर को आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस के रूप में नामित किया गया। यह दिवस स्वयंसेवकों से जुड़े संगठनों और व्यक्तिगत स्वयंसेवकों को स्वयंसेवा के महत्व को बढ़ावा देने, सरकारों को इन प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित करने और दुनिया भर के स्वयंसेवकों के समर्पण को पहचानने का अवसर प्रदान करता है। सरकारों, नागरिक समाज संगठनों और संयुक्त राष्ट्र स्वयंसेवक कार्यक्रम जैसे संस्थानों ने स्वयंसेवी कार्य के महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस वैश्विक उत्सव का उद्देश्य दुनिया भर के लाखों स्वयंसेवकों को श्रद्धांजलि देना है, जो गरीबी, असमानता और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अपना बहुमूल्य समय और प्रयास स्वेच्छा से समर्पित करते हैं। नतीजतन, आज दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग सक्रिय रूप से विभिन्न स्तरों (स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय) पर स्वेच्छा से अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, जिससे समुदायों में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।


स्वयं सेवा से जुड़े लोगों का उद्देश्य बहुत विशाल है, जो बेहतर दुनिया के लिए संकल्पित है, जैसे गरीबी समाप्त करना, सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा स्थापित करना, लैंगिक समानता को बढ़ावा देना, महिलाओं को मतदान का अधिकार प्रदान करना, शिशु मृत्यु दर को कम करना, मातृ स्वास्थ्य को बेहतर बनाना, एचआईवी/एड्स, मलेरिया, डेंगू और अन्य गंभीर बीमारियों के प्रसार को रोकना, साथ ही पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना। हम सभी को उनके महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार करना चाहिए और उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए। उनका काम दूसरों को खुश करता है और हमें सुरक्षित रखता है। हम इस दिन इन सामाजिक चेतना सम्पन्न एवं समाज के लिए संकल्पित लोगों का सम्मान करते हैं।

दिलीप कुमार पाठक 
लेखक पत्रकार हैं 

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