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"डिजिटल दौर में शब्द-साधना: किताबों की ओर लौटता युवा मन"

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 "डिजिटल दौर में शब्द-साधना: किताबों की ओर लौटता युवा मन" दिल्ली की ठिठुरती हुई जनवरी की सुबह और भारत मण्डपम की भव्यता के बीच एक अलग ही संसार बसा हुआ है। यहाँ की फिजाओं में केवल कागज और ताजी स्याही की खुशबू नहीं है, बल्कि यह उन उम्मीदों की महक है जो बताती हैं कि तकनीक के शोर के बीच भी इंसान का अपनी जड़ों से जुड़ाव बना हुआ है। विश्व पुस्तक मेला 2026 केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक महाकुंभ बन गया है। सबसे सुखद दृश्य यह है कि इस मेले की असली रौनक आज का युवा और छोटे बच्चे हैं। अक्सर यह चिंता जताई जाती है कि 'रील' और 'शॉर्ट वीडियो' के इस दौर में एकाग्रता खत्म हो रही है, लेकिन यहाँ उमड़ी यह भीड़ गवाही दे रही है कि दुनिया अभी बची रहेगी, क्योंकि यहाँ का युवा पन्नों के सन्नाटे को मोबाइल के शोर पर तरजीह दे रहा है। यह देखना दिल को सुकून देता है कि आज की पीढ़ी केवल समकालीन लेखकों तक सीमित नहीं है। स्टालों पर घूमते हुए जब आप देखते हैं कि युवा मुंशी प्रेमचंद के 'गोदान' के पात्रों की बात कर रहे हैं या हरिवंश राय बच्चन की 'मधुशाला' के दर्शन...

वेदांत से युवा शक्ति का अभ्युदय और स्वामी विवेकानंद का कालजयी दर्शन

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वेदांत से युवा शक्ति का अभ्युदय और स्वामी विवेकानंद का कालजयी दर्शन (12 जनवरी राष्ट्रीय युवा दिवस व स्वामी विवेकानंद जयंती पर विशेष लेख)  भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को वैश्विक पटल पर गौरवान्वित करने वाले युगपुरुष स्वामी विवेकानंद की जयंती, 12 जनवरी, देश के इतिहास में केवल एक तिथि नहीं बल्कि एक ऊर्जावान उत्सव है। जिसे हम राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाते हैं, वह वास्तव में उस महामानव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है जिसने सोए हुए भारत को उसकी अंतर्निहित शक्तियों से परिचित कराया। विवेकानंद ने जिस वेदांत दर्शन की व्याख्या की, वह हिमालय की गुफाओं तक सीमित रहने वाला शुष्क ज्ञान नहीं था, बल्कि वह एक 'व्यावहारिक वेदांत' था जो खेत-खलिहानों, कारखानों और युवाओं के अंतर्मन में क्रांति लाने का सामर्थ्य रखता था। उन्होंने शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में जब 'मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों' कहकर संबोधन शुरू किया, तो वह केवल शब्द नहीं थे, बल्कि अद्वैत वेदांत की वह अनुभूति थी जो पूरी सृष्टि को एक परिवार मानती है। उनके दर्शन का मूल आधार यह था कि प्रत्येक आत्मा दिव्य ह...

मोस्ट लविंग पर्सन इन दी यूनिवर्स"

"मोस्ट लविंग पर्सन इन दी यूनिवर्स"  किसी भी फिल्म एवं अभिनेता के सफल होने के लिए अच्छी कहानी, उम्दा संगीत एवं निर्देशक की दूरदर्शी सोच का होना जरूरी होता है. अपने शुरुआती दौर से ही शाहरुख कहानियों का चयन बहुत सोच-समझकर करते थे. शाहरुख फ़िल्म की कहानी समझते, देखते थे, इस फिल्म की कहानी से दर्शक जुड़ पाएंगे क्या? डीडीएलजे, वीर - जारा दोनों फ़िल्मों का चयन शाहरुख की सिनेमाई समझ को दर्शाता है. इसमे शाहरुख ऐक्टिंग को यथार्थवाद से जोड़ने में सफल दिखते हैं. डीडीएलजे, वीर - जारा की कहानी एक उदेश्य के तहत लिखी गईं.  डीडीएलजे का राज लंदन में पला-बढ़ा जो बहुत आधुनिक था. अपनी प्रेमिका के कहने पर भी सिमरन को भगाने के लिए तैयार नहीं था. वह उसके पिता की आज्ञा चाहता है. लंदन में पला बढ़ा राज भारतीय संस्कृति को बचाने की बात कर रहा था, हालांकि उससे हो नहीं पा रहा था, फिर भी वो गिरते - पड़ते सभी का दिल जीत गया.. यही कारण रहा शाहरुख खान को सिने प्रेमियों ने पलकों पर बिठा लिया था. लोग जानना चाहते हैं कि डीडीएलजेे की आपार सफ़लता का राज क्या है, आम तौर पर फ़िल्मों में हीरो मार - धाड़ करके नायिका क...

सायबर क्राइम

*किसका करें यक़ीन? जब अपने ही बन जाएं सायबर अपराधी* एक दिन मेरी दोस्त अनुप्रिया को उनके प्रिय मित्र अरुण ने फोन करके बताया - 'अनुप्रिया एक बात बताने जा रहा हूं ध्यान से सुनना. तुम्हारा एक दोस्त है न' सोमेश' नागपुर वाला उसने तुम्हारे नाम से किसी जापानी कम्पनी से तुम्हारे नाम से लोन ले लिया है, और गारंटी के तौर पर तुम्हारी तस्वीर और तुम्हारा नंबर दे दिया है. अच्छा एक बात सुनो उसे मेरा नंबर कहाँ से मिला? क्योंकि उसने तुम्हारा और मेरा नंबर दे दिया है. अब चूंकि तुम्हारा नंबर नहीं लगा तो उन्होंने मुझे कॉल किया था और मुझसे पूछा कि क्या आप अनुप्रिया के दोस्त हैं? मैंने कहा हाँ.... अब उन्होंने कहा है कि 'सोमेश' ने आपकी गारंटी से लोन लिया है तो आपको चुकाना पड़ेगा. और उन्होंने दो लाख रुपए 24 घण्टे के अंदर माँगा है. अन्यथा वे तुम्हारी तस्वीरों का नाजायज इस्तेमाल करेंगे... और हाँ तुम प्लीज परेशान मत होना किसी से घर पर बताना मत. तुम अभी पैसे मत भेजो मैं कुछ जुगाड़ करके पैसे चुका देता हूं, फिर तुम मेरे वापस कर देना. अभी तो मेरे पास हैं तो नहीं लेकिन मैं कुछ करता हूँ, तुम चिंता मत ...

प्रभु राम: आस्था का सेतु और मानवता का शाश्वत संदेश

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प्रभु राम: आस्था का सेतु और मानवता का शाश्वत संदेश (11 जनवरी तिथि अनुसार प्रभु श्री राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर")  आज 11 जनवरी 2026 को जब अयोध्या में प्रभु श्री राम के दिव्य विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ (तिथि अनुसार) मनाई जा रही है, तो यह केवल एक मंदिर का उत्सव नहीं, बल्कि उन मानवीय मूल्यों का पर्व है जो सदियों से भारतीय समाज को जोड़े हुए हैं। श्री राम का व्यक्तित्व किसी भौगोलिक सीमा या विशेष विचारधारा तक सीमित नहीं है; वे एक ऐसी 'मर्यादा' के प्रतीक हैं जो हर मनुष्य के लिए अनुकरणीय है। आज का दिन आत्मचिंतन का है कि हम उनके जीवन से उन सूत्रों को कैसे निकालें जो आज के आधुनिक और अशांत समाज को नई दिशा दे सकें। प्रभु श्री राम का आध्यात्मिक पक्ष हमें 'भीतर के रावण' को जीतने की प्रेरणा देता है। अध्यात्म की दृष्टि में राम का अर्थ है—वह जो कण-कण में रमण करता है। जब हम राम की बात करते हैं, तो हम एक ऐसे चरित्र की बात करते हैं जिसमें धैर्य, करुणा और न्याय का अद्भुत संतुलन है। आज के आपाधापी भरे दौर में, जहाँ मानसिक तनाव ...

"वैश्विक फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ती हमारी हिंदी"

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"वैश्विक फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ती हमारी हिंदी"  (10 जनवरी विश्व हिन्दी दिवस)  आज 10 जनवरी है, वह ऐतिहासिक दिन जब दुनिया भर के हिंदी प्रेमी अपनी भाषाई पहचान और सांस्कृतिक गौरव का उत्सव मनाते हैं। 'विश्व हिंदी दिवस' केवल एक औपचारिक आयोजन भर नहीं है, बल्कि यह उस वैश्विक यात्रा का प्रतिबिंब है जिसे हिंदी ने सदियों के संघर्ष और गौरवशाली साहित्य के साथ तय किया है।  10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन की स्मृति में शुरू हुआ यह सिलसिला आज वर्ष 2026 में एक ऐसे स्वर्णिम मुकाम पर पहुँच चुका है, जहाँ हिंदी ने क्षेत्रीयता की सीमाओं को लांघकर 'ग्लोबल' पहचान हासिल कर ली है। आज यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा के रूप में न केवल करोड़ों लोगों के संवाद का जरिया है, बल्कि कूटनीति, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में भी अपनी धाक जमा रही है। हिंदी की सबसे बड़ी शक्ति इसकी वैज्ञानिकता, सरलता और समावेशी प्रकृति है। देवनागरी लिपि की यह विशेषता है कि जैसा बोला जाता है, वैसा ही लिखा भी जाता है, जो इसे दुनिया की सबसे सुस्पष्ट भाष...

"अदृश्य रफ्तार: क्यों जरूरी है पृथ्वी की निरंतर धुरी पर दौड़?"

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"अदृश्य रफ्तार: क्यों जरूरी है पृथ्वी की निरंतर धुरी पर दौड़?" पृथ्वी घूर्णन दिवस हर साल 8 जनवरी को मनाया जाता है, जो हमें हमारे ग्रह की उस निरंतर गति की याद दिलाता है जिसे हम महसूस तो नहीं कर पाते, लेकिन जिसका हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।  यह दिन वैज्ञानिक जिज्ञासा और सत्य की खोज का प्रतीक है, जो सदियों के अंधविश्वास को तोड़कर वैज्ञानिक तथ्यों की स्थापना को समर्पित है। सदियों पहले तक मनुष्य का यह मानना था कि पृथ्वी स्थिर है और सूर्य सहित सभी खगोलीय पिंड इसके चारों ओर चक्कर लगाते हैं। लेकिन विज्ञान की प्रगति के साथ यह स्पष्ट हुआ कि हमारी पृथ्वी न केवल सूर्य की परिक्रमा करती है, बल्कि अपनी धुरी पर भी निरंतर घूमती रहती है। इसी घूर्णन गति के कारण ही पृथ्वी पर दिन और रात का चक्र चलता है, जो जीवन की लय को निर्धारित करता है। इस वैज्ञानिक सत्य की गहराई में जाएं तो हम पाते हैं कि पृथ्वी की यह घूर्णन गति केवल समय का मापदंड नहीं है, बल्कि यह हमारे अस्तित्व का आधार भी है। आज के आधुनिक युग में जब हम 2026 में प्रवेश कर चुके हैं, विज्ञान हमें यह समझने में मदद करता है कि पृथ्वी लगभग 16...