सफेद सोने का संकट और किसानों की जमीनी हकीकत
सफेद सोने का संकट और किसानों की जमीनी हकीकत विशेष लेख (07 अक्टूबर विश्व कपास दिवस) भारत के कृषि और औद्योगिक ढांचे में कपास केवल एक व्यापारिक फसल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। देश के करीब 60 लाख किसान सीधे तौर पर इसकी खेती से जुड़े हैं, जबकि कपड़ा उद्योग के माध्यम से यह सेक्टर 4 से 5 करोड़ लोगों को रोजगार देता है। राष्ट्रपिता गांधी जी ने कहा था कि भारत का उद्धार उसके कताई चक्र और खादी में निहित है, जो देश के करोड़ों भूखे लोगों को आजीविका दे सकता है। गांधी जी का यह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है। 7 अक्टूबर को विश्व कपास दिवस के वैश्विक आयोजन के बीच, भारतीय कपास क्षेत्र के सरकारी आंकड़ों और खेतों के कड़वे सच के बीच के फासले का तटस्थ विश्लेषण बेहद जरूरी हो जाता है। वैश्विक परिदृश्य में भारत कपास के बुवाई क्षेत्र के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर है। देश के लगभग 114.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की जाती है। उत्पादन की दृष्टि से भारत, चीन के बाद विश्व में दूसरे पायदान पर आता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू सीजन में देश का कुल कपास उत्पादन...