डिजिटल आक्रामकता के जाल में फंसा बचपन'
'डिजिटल आक्रामकता के जाल में फंसा बचपन' (4 जून आक्रामकता के शिकार मासूम बच्चों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस) आजकल घरों में शाम के वक्त एक खामोश नजारा दिखाई देता है। पूरा परिवार एक ही कमरे में, एक ही सोफे पर साथ बैठा होता है, लेकिन आपस में कोई बातचीत नहीं होती। सब के सब चुपचाप अपने-अपने मोबाइल की स्क्रीन में खोए रहते हैं। माता-पिता भी इस बात से बड़े खुश और बेफिक्र रहते हैं कि उनका बच्चा बाहर धूप या धूल-मिट्टी में नहीं घूम रहा है, बल्कि घर के अंदर आराम से सुरक्षित बैठा है। लेकिन क्या कभी हमने ठंडे दिमाग से बैठकर यह सोचने की कोशिश की है कि स्क्रीन में अपनी आंखें गड़ाए बैठा हमारा यह मासूम बच्चा अंदर ही अंदर किस मानसिक दौर से गुजर रहा है? कहीं उसके नन्हें दिमाग पर नकारात्मक असर तो नहीं हो रहा? हर साल 4 जून को पूरी दुनिया में 'आक्रामकता के शिकार मासूम बच्चों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस' मनाया जाता है। पुराने जमाने में जब इस दिन की चर्चा होती थी, तो बच्चों पर अत्याचार का सीधा सा मतलब लड़ाई-झगड़े, युद्ध, दंगे या फिर फैक्ट्रियों में होने वाली बाल-मजूदरी से लगाया जाता था। लेकिन आज के इस ...