सड़क पर छात्र, बहरी सरकार और न्यायपालिका : फिर कैसा लोकतंत्र?
सड़क पर छात्र, बहरी सरकार और न्यायपालिका : फिर कैसा लोकतंत्र? आज देश का युवा और छात्र वर्ग गहरे संकट में है। जब भी इतिहास में बड़े बदलाव हुए हैं, उनकी शुरुआत हमेशा कॉलेजों से ही हुई है। छात्र देश का भविष्य होते हैं, कोई अपराधी नहीं। लेकिन आज जब देश का छात्र अपनी पढ़ाई, परीक्षाओं में धांधली या रोजगार की मांग लेकर सड़कों पर उतरता है, तो उसके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाता है। एक तरफ सरकार उनकी जायज मांगों को सुनने से मना कर देती है, तो दूसरी तरफ उन पर पुलिस की लाठियां और आंसू गैस के गोले छोड़े जाते हैं। सरकार बातचीत के बजाय दमन का रास्ता चुन रही है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो जनता आखिर कहां जाए? एक सच्चे लोकतंत्र की खूबी यह होती है कि वहां विरोध प्रदर्शनों का सम्मान किया जाता है। सरकार का कर्तव्य है कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों को बुलाए, उनकी समस्याओं को समझे और मिलकर रास्ता निकाले। लेकिन मौजूदा समय में संवाद की जगह पूरी तरह खत्म हो चुकी है। सत्ता में बैठे लोग इतने अहंकारी हो चुके हैं कि उन्हें जनता की आवाज सिर्फ एक शोर लगती है। जब युवाओं से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिका...