गाली जब स्वैग बन जाए, तो समझो समाज अभद्र हो चला है
'गाली जब स्वैग बन जाए, तो समझो समाज अभद्र हो चला है' (14 मई राष्ट्रीय शालीनता दिवस) आज 14 मई है। कैलेंडर कहता है कि आज 'राष्ट्रीय शालीनता दिवस' है। सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि क्या अब शालीन रहने के लिए भी कोई खास दिन तय करना पड़ेगा? लेकिन अपने आसपास की डिजिटल दुनिया, सोशल मीडिया के कमेंट बॉक्स और टीवी बहसों के शोर को देखिए, तो अहसास होगा कि शायद आज के दौर में इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। हम तरक्की तो बहुत कर रहे हैं, चांद पर पहुंच रहे हैं, लेकिन हमारी जुबान और व्यवहार से तमीज का रंग उतरता जा रहा है। खासकर इंटरनेट की दुनिया में तो ऐसा लगता है जैसे बदतमीजी करना ही नया फैशन या 'कूल' दिखने का जरिया बन गया है। हमारे बुजुर्ग कहते थे कि इंसान की असली पहचान उसके कपड़ों या उसकी दौलत से नहीं, बल्कि उसकी बोली से होती है। शब्द इंसान के भीतर के संस्कारों का आईना होते हैं। लेकिन आज की हकीकत कुछ और ही है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स ने हमें एक 'नकाब' दे दिया है। मोबाइल स्क्रीन के पीछे छिपे हम लोग खुद को बहुत बड़ा सूरमा समझने लगे हैं। हम वो बातें ...