बाढ़ से आज़ादी कब?
बाढ़ से आज़ादी कब? आज़ादी के 79वें साल में भी देश की 60% बाढ़ का बोझ ढोते बिहार, असम और यूपी मानसून आते ही देश के बड़े हिस्से में खुशियों की फुहारें बरसती हैं, मोर नाचते हैं और किसान मल्हार गाते हैं। ठीक इसी समय पूरा देश अगस्त के महीने में आज़ादी का जश्न मनाने की तैयारियों में डूब जाता है। तिरंगे लहराए जाते हैं और लालकिले की प्राचीर से विकास के बड़े-बड़े दावे गूंजते हैं। लेकिन भारत के तीन राज्यों - बिहार, असम और उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोगों के लिए आसमान से बरसने वाली यह पहली बूंद और आज़ादी का यह महीना किसी उत्सव की शुरुआत नहीं, बल्कि उनकी सामूहिक आपदा लेकर आता है। नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की रिपोर्ट चीख-चीख कर कहती है कि देश के कुल बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले ये तीन राज्य मिलकर सहते हैं। साल 2026 आ चुका है, दिल्ली के वातानुकूलित और आलीशान दफ्तरों में बैठकर चांद-मंगल पर बस्तियां बसाने और 'आत्मनिर्भर भारत' के नारे गढ़े जा रहे हैं। लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि इन तीन राज्यों की आधी आबादी को हर साल जीते-जी जल-समाधि लेने के लिए छोड़ दिया जाता है। जिस देश क...