'एनडीए कुनबे में सांसद बढ़े पर बढ़ गया अंदरूनी असंतोष'
'एनडीए कुनबे में सांसद बढ़े पर बढ़ गया अंदरूनी असंतोष' भारतीय राजनीति में इस समय एक बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। विपक्ष के सांसदों की टूट-फूट से सत्ताधारी एनडीए का कुनबा लगातार बड़ा हो रहा है। ऊपरी तौर पर ऐसा लगता है कि सरकार पहले से कहीं अधिक मजबूत और सुरक्षित हो चुकी है। लेकिन जब हम दिल्ली के राजनीतिक गलियारों और संसद के आंकड़ों की गहराई में जाते हैं, तो कहानी कुछ और ही नजर आती है। बाहर से ताकतवर दिख रही इस सरकार के भीतर तनाव की एक नई लहर दौड़ गई है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने दम पर बहुमत का जाजुई आंकड़ा नहीं छू सकी थी। तब एनडीए ने 293 सीटों के साथ सरकार का गठन किया था। सरकार को टिकाए रखने के लिए 272 सांसदों की जरूरत होती है। हाल के दिनों में विपक्षी खेमे, खासकर टीएमसी और शिवसेना, जैसे दलों से सांसदों के पाला बदलने के कारण अब एनडीए का आंकड़ा 313 के पार पहुंच चुका है। सीधे गणित से देखें तो अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इस सरकार को गिराना विपक्ष के लिए पूरी तरह असंभव है। सरकार गिरने का कोई तात्कालिक खतरा नहीं है, इसलिए सरकार के पूरी तरह अस्थिर होने का द...