अस्थमा की वैश्विक त्रासदी: सबसे ज़्यादा भारत में दुनिया की 46% मौतें
अस्थमा की वैश्विक त्रासदी: सबसे ज़्यादा भारत में दुनिया की 46% मौतें शहर की भागती भीड़ में अगर आप किसी चौराहे पर खड़े होकर गौर करें, तो आपको हर पांचवें-छठे बच्चे के कंधे पर लटके स्कूल बैग के किनारे से एक प्लास्टिक का 'इनहेलर' झांकता मिल जाएगा। यह आज की वह कड़वी हकीकत है जिसे हम विकास की चकाचौंध में अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। हमने आलीशान हाईवे और चमकते एक्सप्रेस-वे तो बना लिए, हाथ में 5जी मोबाइल भी थाम लिया, लेकिन उसी हाथ में हमारे बच्चों के लिए नेबुलाइजर की पाइपें भी थमा दीं। हम विकास की ऐसी दौड़ में शामिल हो गए हैं जहां बैंक बैलेंस तो बढ़ रहा है, लेकिन फेफड़ों की उम्र घट रही है। आज 'विश्व अस्थमा दिवस' पर जब दुनिया इलाज की पहुंच की बात कर रही है, तो हमें यह पूछना होगा कि क्या हम वाकई बीमारी का इलाज ढूंढ रहे हैं या उस जड़ को ही खाद-पानी दे रहे हैं जो इस बीमारी को पैदा कर रही है?अस्थमा अब केवल जेनेटिक या 'पुरानी बीमारी' नहीं रह गई है। यह विशुद्ध रूप से एक 'इकोलॉजिकल क्राइम' यानी पर्यावरण के खिलाफ किए गए अपराध का नतीजा है। भारत की हवा में जो जहर घुल ...