सत्ता नहीं सुनने वाली! तो फ़िर बार - बार अपनी जान दांव पर क्यों लगा रहे हैं सोनम वांगचुक?
सत्ता नहीं सुनने वाली! तो फ़िर बार - बार अपनी जान दांव पर क्यों लगा रहे हैं सोनम वांगचुक? यह इस देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि जो वैज्ञानिक और पर्यावरणविद् पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर चुका है, उसे अपने ही देश में न्याय मांगने के लिए बार-बार भूखा बैठना पड़ रहा है। सोनम वांगचुक, जिन्होंने कुछ समय पहले लद्दाख की बर्फीली वादियों और वहां के नाजुक पर्यावरण को बचाने के लिए शून्य से नीचे के तापमान में हफ्तों लंबा अनशन किया था, आज वही वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर भीषण गर्मी में अपनी जान दांव पर लगाए हुए हैं। इस बार उनका अनशन केवल लद्दाख के अधिकारों के लिए नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवा छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने और देश की परीक्षा प्रणाली में लगे 'पेपर लीक' के घुन को साफ करने के लिए है। यह पहली बार नहीं है जब सोनम वांगचुक ने किसी बड़े मकसद के लिए पानी और नमक पर दिन गुजारे हैं। इससे पहले लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा दिलाने के आंदोलन के दौरान उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम जैसी सख्त धाराओं के तहत महीनों तक जेल की सलाखें भी झेलन...