'तन से मन तक: भागती-दौड़ती जिंदगी को ठहराव देता योग'
'तन से मन तक: भागती-दौड़ती जिंदगी को ठहराव देता योग' (21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस) आज की सुबह कुछ अलग है। उगते सूरज की हल्की लालिमा सिर्फ आसमान को ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों लोगों के चेहरों को भी नई चमक दे रही है। पार्कों में, छतों पर, लिविंग रूम में और समंदर के किनारों पर लाखों लोग अपनी योग मैट बिछाए गहरी सांसें ले रहे हैं। हर साल 21 जून को जब दुनिया 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' मनाती है, तो वह केवल कुछ शारीरिक कसरतों का प्रदर्शन नहीं कर रही होती। असल में, वह अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक सामूहिक उत्सव मना रही होती है। योग किसी मजहब, देश या संस्कृति की बपौती नहीं है। यह इंसान को खुद से जोड़ने का एक बेहद सीधा और सच्चा रास्ता है। आज की तारीख में हमारी सबसे बड़ी समस्या क्या है? पैसा? सुख-सुविधाएं? नहीं, आज हमारे पास सब कुछ है, बस एक 'चैन की सांस' नहीं है। सुबह अलार्म की चीख से शुरू होने वाला दिन, रात को मोबाइल स्क्रीन स्क्रॉल करते हुए थकान के साथ खत्म होता है। हम हर वक्त किसी न किसी अंधी दौड़ में भाग रहे हैं। इस भागदौड़ का सीधा असर शरीर और दिमाग पर पड़ रह...