अकेले क्यों थकना, जब साथ मिलकर बदल सकते हैं जमाना!
अकेले क्यों थकना, जब साथ मिलकर बदल सकते हैं जमाना! (04 जुलाई अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस) सोचिए, अगर हाथ की सिर्फ एक उंगली से किसी भारी चीज को उठाने की कोशिश करें, तो क्या होगा? शायद उंगली में मोच आ जाएगी। लेकिन जब पांचों उंगलियां मिलकर मुट्ठी बन जाती हैं, तो ताकत कई गुना बढ़ जाती है। बस यही सीधा सा फंडा है सहकारिता का। आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर 'मैं, मेरा और मुझे' में खोए रहते हैं। लेकिन साल में एक दिन ऐसा आता है जो हमें याद दिलाता है कि जिंदगी की असली गाड़ी अकेले नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने से ही सुचारू रूप से चलती है। जुलाई का पहला शनिवार इसी एकता और भाईचारे के नाम होता है, जिसे लोग तकनीकी भाषा में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस कह देते हैं। बहुत से लोग इस भारी-भरकम शब्द को सुनकर कन्फ्यूज हो जाते हैं, लेकिन इसका मतलब बहुत ही सीधा है - एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ना। हमारे समाज में हर किसी के पास बहुत सारा पैसा या बड़ी-बड़ी सिफारिशें नहीं होतीं। किसी के पास कोई छोटा सा हुनर होता है, तो किसी के पास थोड़ी सी जमीन। अब अकेले दम पर तो बड़ा बिजनेस खड़ा करना मुमकि...