दुनिया दीवानी फुटबॉल की, अब हमारी बारी!
दुनिया दीवानी फुटबॉल की, अब हमारी बारी! (25 मई विश्व फुटबॉल दिवस) फुटबॉल दुनिया का ऐसा खेल है, जिसे समझने के लिए किसी भाषा की आवश्यकता नहीं है, फ़ुटबाल किसी भी भाषा में आए समझ आता है। मैदान पर पैर की एक जादुई ड्रिबल, एक सटीक पास और नेट से टकराती गेंद - यह वह रोमांच है जो दुनिया के हर कोने को एक धागे में पिरो देता है। यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र ने 25 मई को आधिकारिक तौर पर 'विश्व फुटबॉल दिवस' घोषित किया है। यह फैसला सिर्फ इस खेल की लोकप्रियता का जश्न नहीं है, बल्कि इस बात का सम्मान है कि फुटबॉल दुनिया में शांति, एकजुटता और युवाओं को जोड़ने का सबसे खूबसूरत जरिया है। जब पूरी दुनिया इस खेल के रंग में रंगी है, तब भारत के लिए यह दिन एक नई ऊर्जा और बड़े सपनों के साथ आगे बढ़ने का अवसर है। अक्सर कहा जाता है कि भारत सिर्फ क्रिकेट का दीवाना है, लेकिन सच यह है कि हमारे देश में फुटबॉल को लेकर एक खामोश क्रांति आकार ले रही है। कोलकाता के मैदानों का पारंपरिक जोश हो, केरल की गलियों की दीवानगी हो या पूर्वोत्तर के पहाड़ों से निकलती नई प्रतिभाएं - फुटबॉल का जज्बा हमारी रगों में तेजी से दौड़ रहा...