दया के रंग से, जीवन की कहानी को दें नया साज़

दया के रंग से जीवन की कहानी को दें नया साज़
(विश्व दयालुता दिवस 13 नवंबर 2025)


"दया देने की आदत है, दूसरों का बोझ हल्का करने की इच्छा, या बस एक मददगार हाथ या रोने के लिए कंधा देने की इच्छा। यह हमें मानवीय बनाती है l यह हमें आध्यात्मिक रूप से ऊपर उठाती है। और यह हमारे लिए अच्छा है।" -मदर टेरेसा
साल भर में कई जागरूकता दिवस, सप्ताह और महीने होते हैं, लेकिन इस नवंबर में मेरे लिए सबसे ख़ास है, क्योंकि 13 नवंबर को विश्व दयालुता दिवस मनाया जाता है, इस अंतरराष्ट्रीय उत्सव का लक्ष्य सरल है l जिसमें ऐसी दुनिया की कल्पना को साकार करना है जहां हम सभी के लिए दयावान बनें l दयालुता को अपवाद के बजाय मानक बनाना, इस उत्सव में अक्सर दयालुता के कुछ अनोखे कार्य करने के लिए समय निकालना, उसे आगे बढ़ाने के नए तरीके खोजना और व्यक्तियों को उन कार्यों से जोड़ना होता है जिनके लिए उनकी उदारता की आवश्यकता होती है। विश्व दयालुता दिवस एक ऐसा समय है, जब हम रुककर याद करते हैं कि दयालुता व्यक्तियों और समुदायों के जीवन को समान रूप से स्वस्थ और रूपांतरित कर सकती है। जैसा कि कहा जाता है, "ऐसी दुनिया में जहाँ आप कुछ भी हो सकते हैं, दयालु बनें।" 


विश्व दयालुता दिवस की शुरुआत साल 1998 में वर्ल्ड काइंडनेस मूवमेंट संगठन द्वारा की गई थी, जिसकी स्थापना 1997 के टोक्यो सम्मेलन में दुनिया भर के दयालु संगठनों द्वारा की गई थी l यह कनाडा, जापान, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों में मनाया जाता है l 2009 में, सिंगापुर ने पहली बार यह दिन मनाया इटली और भारत ने भी यह दिन मनाया l ब्रिटेन में विश्व दयालुता दिवस की सह‑स्थापना 2010 में हुई, जब दया‑संगठन के संस्थापक डेविड जेमिली ने माइकल लॉयड‑व्हाइट के अनुरोध पर इस पहल को आगे बढ़ाया। माइकल ने न्यू साउथ वेल्स (NSW) फेडरेशन ऑफ़ पैरेंट्स एंड सिटिज़न्स एसोसिएशन को पत्र लिखकर NSW शिक्षा मंत्री से इस दिन को स्कूल कैलेंडर में शामिल करने को कहा। इस सहयोग से ब्रिटेन में दया दिवस को आधिकारिक मान्यता मिली और हर साल 13 नवंबर को मनाया जाने लगा। साथ ही यूनेस्को की एक संस्था, यूनेस्को- एमजीआईईपी, विश्व दयालुता दिवस को बढ़ावा देने में सक्रिय रही है, खासकर युवाओं को सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा (SEL) के माध्यम से दयालुता और सहानुभूति के लिए प्रशिक्षित करने पर ध्यान केंद्रित करके काम कर रही है l

इस दिन, प्रतिभागी, व्यक्तिगत रूप से या संगठनों के रूप में, अच्छे कार्यों का जश्न मनाकर, उन्हें बढ़ावा देकर और दयालुता के कार्यों का संकल्प लेकर दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने का प्रयास करते हैं l दुर्भाग्य से, हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो तनाव, मानसिक स्वास्थ्य और मादक द्रव्यों के सेवन के प्रति कलंक, हिंसा और ढेर सारे दुखों से ग्रस्त है। विश्व दयालुता दिवस वर्ष में एक ऐसा दिन है जब व्यक्ति दयालुता का अभ्यास करने और दूसरों के लिए अच्छे कार्यों का प्रसार करने के लिए अपनी क्षमता से आगे बढ़ सकते हैं। अपने शब्दों और व्यवहार के माध्यम से जानबूझकर दयालुता का अभ्यास करना आपकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है। हमें अपने आचरण से अपनी अगली पीढ़ी को दयालु बनने की शिक्षा देनी चाहिए l

शोध से पता चला है कि दयालुता मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक, दोनों स्तरों पर खुशी और संतुष्टि से गहराई से जुड़ी हुई है। दयालुता कृतज्ञता, करुणा, सहानुभूति और आपसी जुड़ाव को बढ़ावा देती है। दूसरों के प्रति दयालु होने से, दूसरों को भी दयालुता का बदला चुकाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। दयालुता का अभ्यास करने से दोस्ती और रिश्ते भी मज़बूत होते हैं, और आपके अपने सौभाग्य के प्रति जागरूकता बढ़ सकती है। शोधकर्ता बारबरा फ्रेडरिकसन के अनुसार, दयालुता तनाव को कम करने, हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करने और क्रोध, चिंता व अवसाद जैसी नकारात्मक भावनाओं को कम करने में भी मदद करती है। 

दयालुता का मतलब यह नहीं है कि आपको पैसे खर्च करने पड़ें या मदद के लिए अपनी सीमा से बाहर जाना पड़े। दयालुता उन छोटे-छोटे कामों से भी हो सकती है जिनसे आप बिना समय निकाले दूसरों का बोझ हल्का कर सकें। ट्रैफ़िक में किसी को अपने आगे आने की अनुमति देना l बस, ट्रेन आदि पर बुजुर्गों, महिलाओ, बच्चों के लिए जगह छोड़ना, पड़ोसी से बात करने के लिए समय निकालना l अजनबियों और पड़ोसियों दोनों को "नमस्ते" कहना “कृपया” और “धन्यवाद” कहना। आसपास कूड़ा न फैलाना l किसी के लिए दरवाज़ा खुला रखना l किसी मित्र या अजनबी की अच्छी आदतों की प्रशंसा करना l अनावश्यक कपड़े और घरेलू सामान मुस्कुराते हुए दान करना l अपनी किराने का सामान खुद पैक करना l अपने समुदाय में किसी पशु आश्रय, नर्सिंग होम या इसी तरह के संगठन में स्वयंसेवा करें l  किसी स्थानीय चैरिटी को दान देकर खुद एवं और लोगों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है, इस खास दिन हम संकल्प लें कि इस दुनिया को हम और भी सुन्दर, दयावान एवं करुणामयी बनाएंगे l

दिलीप कुमार पाठक 
लेखक पत्रकार हैं 

Comments

Popular posts from this blog

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया

राम - एक युगपुरुष मर्यादापुरुषोत्तम की अनंत कथा

*ग्लूमी संडे 200 लोगों को मारने वाला गीत*