डिजिटल हिंसा रोकें, महिलाओं को सशक्त बनाएं

डिजिटल हिंसा रोकें, महिलाओं को सशक्त बनाएं

महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा दुनिया में सबसे प्रचलित और व्यापक मानवाधिकार उल्लंघनों में से एक है। दुनिया भर में, लगभग तीन में से एक महिला को अपने जीवन में कम से कम एक बार शारीरिक और/या यौन अंतरंग साथी हिंसा, गैर-साथी यौन हिंसा, या दोनों का सामना करना पड़ा है l यह एक ऐसा अभिशाप है जो विभिन्न परिस्थितियों में बढ़ रहा है , लेकिन इस वर्ष, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा उन्मूलन के अंतर्राष्ट्रीय दिवस का अभियान विशेष रूप से डिजिटल क्षेत्र पर केंद्रित है l ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर महिलाओं के विरुद्ध हिंसा आज एक गंभीर और तेज़ी से बढ़ता ख़तरा है जो कई महिलाओं की आवाज़ को दबाने की कोशिश करता है, खासकर उन महिलाओं की जो राजनीति, सामाजिक कार्यकर्ता या पत्रकारिता जैसे क्षेत्रों में मज़बूत सार्वजनिक और डिजिटल उपस्थिति रखती हैं।
यह हिंसा का एक ऐसा रूप है जो अपर्याप्त तकनीकी कानून कुछ देशों में इस प्रकार की आक्रामकता को कानूनी मान्यता न मिलने, डिजिटल प्लेटफार्मों की दंडमुक्ति, एआई का उपयोग करके दुर्व्यवहार के नए और तेजी से विकसित होते रूपों, लैंगिक समानता का विरोध करने वाले आंदोलनों, अपराधियों की गुमनामी और डिजिटल पीड़ितों के लिए सीमित समर्थन के कारण बढ़ रहा है। 

महिलाओं के विरुद्ध हिंसा उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर यूएनआईटीई अभियान (25 नवंबर - 10 दिसंबर) का शुभारंभ हो रहा है l 16 दिनों की सक्रियता की पहल, जिसका समापन अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस (10 दिसंबर) के उपलक्ष्य में होगा l

महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध डिजिटल हिंसा को समाप्त करने के लिए 2025 का यह अभियान , समाज के सभी सदस्यों को संगठित करना चाहता है l सरकारों को दंडात्मक कानूनों के माध्यम से दंडमुक्ति को समाप्त करना चाहिए, प्रौद्योगिकी कंपनियों को प्लेटफार्मों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और हानिकारक सामग्री को हटाना चाहिए l दानदाताओं को धन उपलब्ध कराना चाहिए ताकि नारीवादी संगठन इस हिंसा को समाप्त करने के लिए काम कर सकें l और लोगों को भी पीड़ितों की मदद के लिए अपनी आवाज उठानी चाहिए l

महिलाओं और लड़कियों का पीछा करने, उन्हें परेशान करने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने के लिए डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है l अंतरंग तस्वीरों का गैर-सहमतिपूर्ण साझाकरण - जिसे अक्सर रिवेंज पोर्न या लीक्ड न्यूड कहा जाता है। साइबर धमकी, ट्रोलिंग और ऑनलाइन धमकियाँ। ऑनलाइन उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न। एआई द्वारा उत्पन्न डीपफेक जैसे कि यौन रूप से स्पष्ट चित्र, डीपफेक पोर्नोग्राफी, और डिजिटल रूप से हेरफेर की गई छवियां, वीडियो या ऑडियो। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभद्र भाषा और गलत सूचना। डोक्सिंग  यानि निजी जानकारी प्रकाशित करना। किसी की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए ऑनलाइन पीछा करना या निगरानी/ट्रैकिंग करना। ऑनलाइन ग्रूमिंग और यौन शोषण। महिला विरोधी नेटवर्क - जैसे मैनोस्फीयर , इनसेल फोरम। ये कृत्य सिर्फ़ ऑनलाइन ही नहीं होते, ये अक्सर वास्तविक जीवन में भी ऑफ़लाइन हिंसा का कारण बनते हैं, जैसे ज़बरदस्ती, शारीरिक शोषण, और यहाँ तक कि महिलाओं और लड़कियों की हत्या भी। यह नुकसान लंबे समय तक रह सकता है और पीड़ितों को लंबे समय तक प्रभावित करता है।

डिजिटल हिंसा पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक निशाना बनाती है, जीवन के सभी क्षेत्रों में, लेकिन विशेष रूप से सार्वजनिक या ऑनलाइन दृश्यता वाले लोगों को - जैसे कि कार्यकर्ता, पत्रकार, राजनीति में महिलाएं, मानवाधिकार रक्षक और युवा महिलाओं को ज़्यादा झेलना पड़ता है l इसका प्रभाव उन महिलाओं पर और भी बुरा पड़ता है जो नस्ल, विकलांगता, लिंग पहचान या यौन अभिविन्यास सहित विभिन्न प्रकार के भेदभाव का सामना करती हैं।


38% महिलाओं ने ऑनलाइन हिंसा का अनुभव किया है और 85% ने दूसरों के विरुद्ध डिजिटल हिंसा देखी l गलत सूचना और मानहानि महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन हिंसा के सबसे प्रचलित रूप हैं । सभी ऑनलाइन डीपफेक में से 90-95% गैर-सहमति वाली अश्लील तस्वीरें हैं, जिनमें से लगभग 90 प्रतिशत में महिलाओं को दर्शाया गया है। 73% महिला पत्रकारों ने ऑनलाइन हिंसा का अनुभव होने की बात कही।
40% से भी कम देशों में महिलाओं को साइबर उत्पीड़न या साइबर स्टॉकिंग से बचाने के लिए कानून हैं। इस वजह से दुनिया की 44% महिलाएं और लड़कियां - यानी 1.8 अरब - कानूनी सुरक्षा से वंचित हैं । महिलाओं के विरूद्ध हिंसा उन्मूलन हेतु अन्तर्राष्ट्रीय दिवस पर हम सभी को संकल्प लेना चाहिए कि लोगों को जागरूक करने एवं सुरक्षित एवं सुन्दर वातावरण बनाने के लिए हम सभी को काम करना है, तभी समाज की सार्थकता सिद्ध होगी l


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