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'वीके मूर्ति हिन्दी सिनेमा की आँखे'

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             'वीके मूर्ति हिन्दी सिनेमा की आँखे'        ________________________________         हिन्दी सिनेमा में हमेशा हम नायक, नायिकाओं, गायक, गीतकारों, संगीतकारों, आदि का जिक्र करते हैं, लेकिन हम फिल्मी हस्तियों के बीच हमेशा तकनीकी लोगों को भूल जाते हैं. ऐसे ही हिन्दी सिनेमा के एक नायाब कैमरामैन 'वीके मूर्ति' हुए हैं, जो गुरुदत्त साहब की टीम का अभिन्न हिस्सा थे. गुरुदत्त साहब ने एक से बढ़कर एक नगीने हिन्दी सिनेमा के मुकुट में जड़ें हैं, हालांकि हिन्दी के प्रारंभिक दौर को गोल्डन एरा कहा जाता है ,और उसी को हिन्दी सिनेमा का आदर्शकाल कहा जाता है. आदर्श दौर कहने का कारण यह भी है कि आज सोशल मीडिया के दौर में भले ही प्रमुख तकनीकी लोग गुमनाम हों, लेकिन उस दौर में कैमरामैन वी.के. मूर्ति जैसे प्रतिभाशाली लोग खूब मकबूलियत हासिल करते हुए पहिचाने जाते थे. सभी का अपना - अपना मुकाम होता था.  अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए 'वीके मूर्ति' महान फ़िल्में जैसे 'जाल', 'प्यासा'. 'काग़ज़ के फूल', 'साहिब, बीबी और ...