'आजाद परिंदों की रुकती नहीं परवाजे' शशि कपूर
'आज़ाद परिंदों की रुकती नहीं परवाजें' (शशि कपूर) एक ऐसा अभिनेता जो अपनी खूबसूरती के कारण सिल्वर स्क्रीन पर चमकने से पहले ही चर्चाओं में था. शर्मिला टैगोर इस नवयुवक को देखते ही रह गईं थीं. एक ऐसा हैंडसम, यंगमैन जिसकी तस्वीर देखकर अमिताभ बच्चन ने सोचा कि अगर ऐसे लोग हमारी स्पर्धा में हैं, तो शायद हम जैसे बेहद साधारण दिखने वालों को हीरो बनने का ख्वाब छोड़ देना चाहिए. एक ऐसा हीरो जिसने थियेटर के साथ व्यवसायी सिनेमा के साथ ग़ज़ब का समन्वय स्थापित किया. कपूर खानदान का अनोखा हीरो जो सिल्वर स्क्रीन से पहले थियेटर की दुनिया का मझा हुआ कलाकार था. बेहद प्रतिभाशाली, आकर्षक व्यक्तित्व बेहद खूबसूरत होने के बाद भी उस तरह के हीरो नहीं बन पाए, जिस मुकाम के हकदार थे. आज 'शशि कपूर' के जन्मदिन पर उनको याद करने का दिन है, जिन्होंने सिनेमा में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया. शबाना आज़मी, श्याम बेनेगल, अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, नसीरूद्दीन शाह, जैसे सिनेमाई समझ के उत्तम लोगों ने कई बार कहा है कि हिन्दी सिनेमा का दुर्भाग्य है कि उसने शशि कपूर से वो सब नहीं ले सका... जितनी ज्यादा इनके काबिलियत...