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अभी न जाओ छोड़कर

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'अभी न जाओ छोड़कर' वैसे तो हर गीत की अपनी कहानी होती है, गोल्डन एरा का प्रत्येक गीत लंबी साधना के बाद तैयार होता था. देव साहब की फ़िल्मों में रूहानी मुहब्बत को दर्शाते गीतों में ग़ज़ब का संगीत होता है. देव साहब की संगीत की समझ-परख ने हिन्दी सिनेमा को प्रत्येक रस से सुसज्जित गीतों की एक नायाब माला भेंट की है. जिसे हर स्थिति में उनके हर गीत को दशकों बाद गुनगुनाती हैं, भारतीय पीढ़ियां... "अभी न जाओ छोड़कर" एक ऐसा गीत जो जुनूनी इश्क़ को बयां करता प्रेमी अपनी प्रेयसी से ऐसा भाव व्यक्त करते हुए उसकी मौजूदगी को चाहत है. आज भी कोई न महिला प्रसंशक इस गीत को गुनगुनाती हैं, तो लगता है, जैसे वो अपने रूपहले पर्दे के प्रेमी देवानंद साहब को जैसे प्रेम प्रस्ताव भेज रहीं हैं.... देवानंद साहब को एक-एक गीत मिलने के पीछे उन महारथियों की फौज थी, जो अपने - अपने अंदाज़ के बादशाह थे. साहिर, मजरुह अल्फाजों की रियासत के सरदार थे, तो बर्मन दादा संगीत की दुनिया के पैगंबर थे, तो रफी साहब & किशोर दा आवाज़ एवं सूफ़ी दुनिया के राजकुमार थे. अभी न जाओ छोड़कर गीत के साथ साहिर लुधियानवी साहब का ज़ि...