'जॉगर्स पार्क फिल्म'
. प्रेम का अपना संसार हिन्दी सिनेमा का अपना एक तिलिस्म है, मेरे ऊपर भी है, जहां आज के दौर में कला फ़िल्में देखने का अपना एक मज़ा है. जॉगर्स पार्क एक ऐसी फिल्म जो समान्य तो नहीं है, अपितु थोड़ा अलग है. सुभाष घई बेहतरीन फ़िल्मों का निर्माण करने एवं बेहतरीन लेखन के लिए जाने जाते हैं. सुभाष घई ने हमेशा ही कुछ यादगार रचा है, जब भी कुछ रचा है, चर्चा का विषय ज़रूर रहा है. बुढ़ापे में एकाकी हो चुके सेवानिवृत्त न्यायाधीश के एकाकीपने को प्रेम की तरफ़ ले जाने वाली अनुभूति पर एक बेहतरीन फिल्म का निर्माण कर डाला. फिल्म का नाम "जॉगर्स पार्क" है. फिल्म में हम एक विवाहित, प्रसिद्ध, सेवानिवृत्त न्यायाधीश और एक स्वच्छन्द स्वभाव 30 -लड़की के बीच प्रेम की पनपता है,जो भावनापूर्वक तो उचित है, लेकिन समाज ने इसे अभी तक स्वीकृत नहीं किया फिल्म में जेनी (पेरिज़ाद ज़ोरबियन) और जस्टिस जेपी चटर्जी (विक्टर बनर्जी) दोनों ही अपनी भूमिकाओं में बेहतरीन लगे, खासकर विक्टर बनर्जी ने तो अपनी अदाकारी से फिल्म अपने नाम कर ली. कई लोग 'विक्टर बनर्जी' को जानते भी नहीं होंगे. यह सच है! विक्टर बनर्ज...