"शब्दों के जादूगर मजरुह सुल्तानपुरी"
एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल 'मजरुह सुल्तानपुरी' मजरुह सुल्तानपुरी एक ऐसा शब्दों का जादूगर, जिन्होंने ग़ज़लें, शायरी, गीतों को रचा. नायाब हर्फों का पूरा का पूरा नौ रंगों का संगीत, साहित्य को रचते हुए अपने नेपथ्य में चले गए. टूटे हुए दिलों को मरहम लगाते गीत. उदास शामों के नग्मे, उर्जावान सुबह को परिभाषित करते गीत. प्रेमी - प्रेमिका एक - दूसरे को आसमान लेकर आने वाले गीत. सामजिक सरोकार को दर्शाती हुई उनकी कलम की ताकत, बिना किसी संकोच, भय के मदमस्त होती सत्ता के सीने में चढ़कर उसके नाकाब उतारने का हुनर, मजरुह सुल्तानपुरी साहब को एक ऐसा क्रांतिकारी बनाती थी, जो सत्ता से टकराते हुए जेल की दीवारों में कैद हो गए. कभी समझौता नहीं किया, साहित्यकारों के चने खाकर ज़िन्दा रहने की बात को भी सच कर दिखाया. मजरुह सुल्तानपुरी एक ऐसे शायर, गीतकार, जिनके गीत ज़ख्मी दिलों पर मरहम का काम करते थे. हिन्दी सिनेमा के ऐसे गीतकार जिन्होंने गीतकार बनने से पहले रोजमर्रा की ज़िन्दगी जीने के लिए युनानी हकीम की शिक्षा ली, और ज़ख्मी दिलों पर अपनी रूहानी शायरी का म...