महान शायर 'हसरत जयपुरी'
जीवन का हर रंग गीतों में उतारने वाले महान गीतकार /शायर' 'हसरत जयपुरी' हसरत जयपुरी की बेटी अपने पिता से कहती थीं, "मुझे आपके जैसे मुहब्बत के नग्मे लिखना हैं. आपकी तरह ज़िन्दगी का हर एक रंग लिखना चाहती हूं, मुझे भी शायरी लिखने का जुनून है, कैसे लिखूँ क्या करूँ? हसरत जयपुरी साहब अपनी बेटी से कहते थे " शायरी तुमसे नहीं होगी, तुम्हें बार - बार प्यार करना पड़ेगा. टूटे हुए दिल से दर्द के नग्मे निकलते हैं, फिर तजुर्बे से ज़िन्दगी का हर एक रंग निखर कर आता है. लिहाज़ा तुम खुश रहो छोड़ो शेरो /शायरी.. कालांतर में शायर हसरत जयपुरी साहब ने अपनी प्रेयसी से अपनी मुहब्बत का इज़हार करने के लिए एक कविता लिखी थी. उस कविता के शब्द कुछ इस तरह थे - "ये मेरा प्रेमपत्र पढ़कर, के तुम नाराज़ ना होना...पड़ोस की उस लड़की का 'राधा' नाम था. इस पत्र को कभी उसको नहीं दे पाए, जिसके लिए उन्होंने लिखा था. हसरत साहब ने अपनी प्रेयसी को दिल की बात ही न कह सकें.. अंततः वो अपने गीतों, रचनाओं में अपनी प्रेमिका को ही ढूढ़ने का प्रयास करते रहते थे. उनकी ज़िंदगी का अनुभव तो यही कहता है, कि पहले द...