'अभिनय का नायाब फनकार मनोज बाजपेयी'
'अभिनय का नायाब फनकार' (मनोज बाजपेयी) 'मनोज बाजपेयी' रंगमंच का एक ऐसा अदाकार , जो आज केवल और केवल अपनी अदाकारी से अपने चरम पर हैं. जिसका लक्ष्य कभी सुपरस्टार बनना नहीं, अपितु एक अदाकार बनना था. सच्चाई यह भी है कि न तो वो अमिताभ बच्चन की तरह बुलन्द आवाज़ के मालिक हैं, न ही सलमान के तरह डोले - शोले हैं, और न ही शाहरुख की तरह रोमांस कर सकते... और न ही अक्षय, जॉन की तरह एक्शन कर सकते, फिर भी उनके पास है, सबसे अलहदा दृष्टिकोण के साथ - साथ बेह्तरीन संवाद अदायगी है. अदाकारी में बोलने का अपना एक मह्त्व होता है. 'मनोज बाजपेयी' बोलने के लिहाज से आज के दौर में सबसे उत्तम हैं..उनकी आवाज़ से नफासत टपकती है. अपनी उम्र के इस पड़ाव में आते आते अदाकार सीरियस अभिनय शुरू करते हैं, लेकिन 'मनोज बाजपेयी' किवदंती बन गए हैं. यह मुकम्मल मयार उनकी अपनी मेहनत, लगन, के साथ - साथ ही सीखने-समझने का प्रतिफल है. 'मनोज बाजपेयी' बचपन में अमिताभ बच्चन की फ़िल्मों को देखकर प्रभावित होते थे, आम तौर पर 70 - 80 वाले दशक में जवान होती पीढ़ियों का यही मानना था... जैसे ही ...