"सफ़र में धूप तो होगी चल सको तो चलो"
इक्कीसवीं सदी का सबसे बड़ा प्रयोगवादी राजनीतिक संत सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो कहीं नहीं कोई सूरज धुआँ धुआँ है फ़ज़ा ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो, निदा फाजली प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर पांच साल पहले कांग्रेस ने राहुल गांधी ने सदन में अनैतिक राजनीति करने का आरोप लगाया था. तब प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल को निदा फाजली को यह शेर सुनाया था. मुझे याद है, यह शेर खुद राहुल को बार - बार याद आता होगा. तब आज वो चल पड़े हैं. राहुल गांधी को सब कुछ अपने परिवार के कारण मिला. उनकी शख्सियत में कुछ ख़ास नहीं था. ऐसे ही जैसे आम नवयुवक होते हैं, सभी को अपने हिस्से कुछ न कुछ करना ही होता है. राहुल ने भी चुन लिया बिजनेसमैन बनना है. नियति आपको कहीं और ही ले जाती है. जहा...